धार्मिक भेदभाव से जुड़े सभी मुद्दों पर नौ जजों की बेंच करेगी सुनवाई, मस्जिद में महिलाओं का प्रवेश, खतना और अन्य धर्म में विवाह

supreme court of india

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) धार्मिक स्थानों पर महिलाओं के खिलाफ भेदभाव से जुड़े सभी मुद्दे तय करेगी, जिस पर नौ जजों की बेंच सुनवाई करेगी| कोर्ट ने विभिन्न धर्मों में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के मामले से निपटने के संबंध में उन सवालों को तैयार करने की प्रक्रिया सोमवार को शुरू की, जिस पर उसे चर्चा करनी है| इसमें केरल के सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़ा मामला भी शामिल है| सुप्रीम कोर्ट सबरीमला मंदिर (Sabarimala Temple) में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के साथ-साथ मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश, और दाऊदी बोहरा समुदाय की महिलाओं के खतना की परंपरा पर भी सुनवाई करेगी|

  • सबरीमला मंदिर (Sabarimala Temple) में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के साथ-साथ मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश, अपने धर्म से बाहर किसी अन्य धर्म में विवाह के लिए इंसाफ और दाउदी बोहरा समुदाय के बीच महिलाओं के खतना की परंपरा पर भी SC(Supreme Court) में होगी चर्चा|
Sabrimala Mandir

पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) ने कहा था कि केरल के सबरीमला मंदिर समेत तमाम अन्य धार्मिक स्थानों पर महिलाओं के प्रति भेदभाव से संबंधित मामले की सुनवाई 9 न्यायाधीशों की संविधान पीठ 10 दिन में पूरा कर लेगी| बेंच ने यह टिप्पणी उस समय की जब सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के समक्ष इस मामले का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अदालत के पूर्व में दिए गए आदेश की अनुपालना में वकीलों की एक बैठक हुई, लेकिन 9 न्यायाधीशों की पीठ के विचार-विमर्श के लिए कानूनी सवालों को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका|

पीठ सभी की सुनेगी दलीलें
जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता में नौ न्यायाधीशों की पीठ सवालों को तय किये जाने के मुद्दे पर एफ एस नरीमन समेत विभिन्न वरिष्ठ वकीलों की दलीलें सुन रही है, जिस पर उसे फैसला करना है| सबरीमला मामले में पिछले साल 14 नवंबर को दिए गए फैसले के माध्यम से विभिन्न धर्मों में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव का मामला वृहद पीठ के समक्ष भेजा गया था|

Pm Modi with Daudi Bohra Muslim

याचिकाओं में उठाए ये मुद्दें
पीठ को याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों, जैसे- मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं के खतना के चलन और अपने धर्म से बाहर किसी अन्य धर्म में विवाह करने वाली पारसी महिलाओं को अधिकार देने से इनकार करने आदि पर दिये गए तर्कों के मद्देनजर अपने सवाल तैयार करने हैं|

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