Kiyara Adwani Bold scene

Kiara Advani Troll: कियारा की बोल्ड फोटो का फैंस ने उड़ाया मज़ाक, बोले- ‘भागो डब्बू कबीर सिंह आ रहा रहा है’

बॉलीवुड एक्ट्रेस कियारा आडवाणी  Kiara Advani की एक फोटो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। इस फोटो में कियारा न्यूड दिख रही हैं, हालांकि एक बड़ी सी पत्ती से उन्होंने अपना शरीर ढक रखा है। ये तस्वीर एक फोटोशूट की है जो कियारा ने मशहूर फोटोग्राफर डब्बू रतानानी के कैलेंडर के लिए करवाया। कलैंडर के लिए यूं तो कई स्टार्स ने फोटोशूट करवाया है लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है कियारा की फोटो की। एक्ट्रेस के इस फोटो पर लोग तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं किसी को ये तस्वीर सेक्सी लग रही है, तो कोई कबीर सिंह का नाम लेकर प्रीति यानी कियारा का मज़ाक उड़ा रहा है।

इतना ही नहीं इस फोटो को क्लिक करने के लिए लोग डब्बू को भी ट्रोल कर रहे हैं। कियारी को लेकर सोशल मीडिया पर तमाम तरह के फनी मीम्स वायरल हो रहे हैं। किसी मीम में वो कपड़ों में दिख रही हैं तो किसी में उन्हें कबीर सिंह से जोड़ दिया गया है। आपको याद होगा साल 2019 में रिलीज़ हुई ‘कबीर सिंह’ में कियारा और शाहिद कपूर लीड रोल में थे। फिल्म में शाहिद ने एक पजेसिव ब्वॉयफ्रेंड का किरदार निभाया था। वहीं प्रीति यानी कियारा  Kiara Advani उनकी गर्लफ्रेंड बनी थीं जो काफी सहमी हुई रहती हैं। इस फिल्म में दोनों के किरादरों को काफी ट्रोल भी किया गया था।

 

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वोडाफोन-आइडिया के पास दो रास्ते, हिस्सेदारी बेचे या दिवालिया घोषित करे: विश्लेषक

वित्तीय संकट से जूझ रही कंपनी वोडाफोन आइडिया के पास अब दो ही विकल्प बचे हैं या तो इसके प्रमोटर कंपनी में हिस्सेदारी बेचे या फिर वह खुद को दिवालिया घोषित करे।

कोलकाता/मुंबई
भारी-भरकम कर्ज और लगातार घाटे के कारण घोर वित्तीय संकट से जूझ रही टेलिकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया पर अब बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। पैसे की तंगी झेल रही कंपनी के पास अब दो ही विकल्प बचे हैं, या तो इसके प्रमोटर कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचें या फिर वह अपने आपको दिवालिया घोषित करे। विश्लेषकों ने यह बात कही है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कंपनी को 17 फरवरी से पहले 53,000 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने का आदेश दिया है

  • वित्तीय संकट से जूझ रही कंपनी वोडाफोन आइडिया के पास अब दो ही विकल्प
  • सके प्रमोटर कंपनी में हिस्सेदारी बेचे या फिर वह खुद को दिवालिया घोषित करे
  • कंपनी को 17 फरवरी से पहले 53,000 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने का है आदेश
  • वोडाफोन आइडिया पर 53,000 करोड़ रुपये का एजीआर बकाया

कंपनी के भविष्य पर आशंका के बादल
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने उम्मीद जताई है कि कंपनी बकाया चुकता कर देगी। हालांकि, विश्लेषक कंपनी के भविष्य को लेकर आशंकित हैं। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच के निदेशक (कॉर्पोरेट्स) नितिन सोनी ने इकनॉमिक टाइम्स से कहा, ‘अगर प्रमोटर्स की तरफ से ताजा इक्विटी निवेश नहीं किया गया तो कंपनी को डूबने से कोई नहीं रोक सकता, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट टेलिकॉम कंपनी द्वारा दाखिल पुनर्विचार याचिका को खारिज कर चुका है, ऐसे में उसे सरकार से कोई राहत मिलने की कोई उम्मीद दिखाई नहीं पड़ रही है।’

वोडाफोन-आइडिया की प्रमोटर्स कंपनियों वोडाफोन ग्रुप तथा आदित्य बिड़ला ग्रुप ने ईटी के सवालों का फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया है।

लगातार छठी तिमाही में घाटा
वोडाफोन आइडिया पर 53,000 करोड़ रुपये का एजीआर (अडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू) बकाया है। गुरुवार को कंपनी की तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी हुए हैं, जिसमें उसे 6,439 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। यह लगातार छठी तिमाही है, जब कंपनी को नुकसान हुआ है। शुक्रवार को बीएसई पर कंपनी का शेयर 23% लुढ़ककर 3.44 रुपये पर बंद हुआ।

NCLT का भी रास्ता
एसबीआईकैप सिक्यॉरिटीज के रिसर्च हेड राजीव शर्मा ने कहा, ‘वोडाफोन आइडिया के पास पैसे नहीं हैं, इसलिए वह राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) में जा सकती है, क्योंकि उसे 17 मार्च को मामले की होने वाली अगली सुनवाई से पहले बकाये का भुगतान करना है।’

सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील ने कहा कि वोडाफोन आइडिया एनसीएलटी में जा सकती है और वह मामले को स्वीकार कर लेता है तो बैंकरप्टसी लॉ के तहत बकाया चुकाने पर रोक लग जाएगी और इस तरह कंपनी को भुगतान नहीं करना पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के पाले में गेंद
उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि कंपनी एक बार फिर कोर्ट जाएगी और अपनी हालत के बारे में उसे बताएगी कि किन कारणों से वह बकाये का भुगतान नहीं कर पाई। उन्होंने कहा, ‘एनसीएलटी 16 फरवरी तक मामले को स्वीकार कर भी सकता है या नहीं भी। अगर स्वीकार करता भी है तो यह सुप्रीम कोर्ट के वोडाफोन आइडिया की वित्तीय हालत पर संज्ञान लेने तथा वह अवमानना के मामले को आगे बढ़ाना चाहता है या नहीं, इसपर निर्भर करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कंपनी को एजीआर का बकाया चुकाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा है कि अगर वह पूरी रकम नहीं चुका सकती है तो एक बड़ी रकम जमा कराए और बाकी रकम बाद में जमा करा सकती है। यह निर्देश अक्टूबर 2019 के फैसले में भी दिया गया था।

वोडाफोन पूंजी निवेश न करने पर अडिग
वोडाफोन आइडिया पहले ही कह चुकी है कि अगर एजीआर मामले में सरकार की तरफ से उसे राहत नहीं मिली तो कंपनी बंद हो सकती है। सोनी ने कहा कि अगर वोडाफोन आइडिया कारोबार बंद करती है तो सरकार को एजीआर के अलावा, स्पेक्ट्रम की बकाया रकम हासिल करने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है, क्योंकि कंपनी के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला पहले ही कह चुकी है कि न्यायालय या सरकार की तरफ से राहत नहीं मिलती है तो कंपनी अपना कारोबार बंद कर सकती है।

क्या होता है AGR
अडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा टेलिकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूसेज और लाइसेंसिग फीस है। इसके दो हिस्से होते हैं- स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज और लाइसेंसिंग फीस, जो क्रमश 3-5% और 8% होता है। समस्या उस वक्त शुरू हुई, जब सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अपने एक आदेश में टेलिकॉम कंपनियों के नॉन कोर बिजनस से हुई आय को भी एजीआर के दायरे में ला दिया, जिससे कंपनियों पर देनदारी में कई गुना इजाफा हो गया।

 

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Now hope to extradite mallya and nirav modi after sanjeev chawla

बुकी संजीव चावला के बाद अब बंधी नीरव मोदी और माल्‍या को लंदन से वापस लाने की उम्‍मीद

सट्टेबाज संजीव चावला को लंदन से वापस भारत लाने के बाद अब उम्‍मीद जग रही है कि आने वाले दिनों में विजय माल्‍या और नीरव मोदी समेत भारत के दूसरे आरोपियों को स्‍वदेश लाया जा सकेगा। इनके अलावा इसी सूची में राजेश कपूर, टाइगर हनीफ, अतुल सिंह, राजकुमार पटेल और शायक सादिक का नाम भी शामिल है जिनकी वापसी का भी इंतजार वर्षों से भारत कर रहा है। इन सभी को भारत की अदालतों की तरफ से भगोड़ा करार दिया गया है। संजीव चावला की ही बात करें तो उससे जुड़ा मैच फिक्सिंग का मामला करीब 19 वर्ष पुराना है।

संजीव चावला को वापस भारत लाने में मिली सफलता के बाद अब उम्‍मीद की जा रही है कि विजय माल्‍या और नीरव मोदी को भी स्‍वदेश लाकर मामला चलाया जाएगा।

1992 से है भारत-ब्रिटेन में प्रर्त्‍यपण संधि

संजीव चावला की वापसी को लेकर भारत सरकार ने कूटनीतिक और कानूनी दोनों ही तरह के प्रयास किए थे, जिन्‍हें अब जाकर सफलता मिली है। हालांकि इसी तरह के प्रयास सरकार द्वारा अन्‍य भगोड़े आरोपियों के लिए भी किए गए हैं लेकिन इनमें अभी सफलता हाथ नहीं लगी है। आपको बता दें कि भारत और ब्रिटेन के बीच वर्ष 1992 में प्रत्‍यर्पण संधि हुई थी। लेकिन यह नवंबर 1993 से लागू हुई थी। इस संधि के तहत भारत में हत्‍या के आरोपी और बांग्‍लादेश के नागरिक को ब्रिटेन से प्रत्‍यर्पित किया गया था। आपको यहां पर ये भी बता दें कि संजीव चावला समेत नीरव और माल्‍या ने भी खुद को भारत प्रत्‍यर्पित न करने को लेकर जो दलील दी थीं उनमें से एक भारतीय जेलों की खराब हालत भी है। लेकिन ब्रिटेन की कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया है।

क्‍या कहते हैं कानूनी जानकार 

दोनों देशों के बीच हुई इस संधि और आरोपियों की वापसी को लेकर संविधान विशेषज्ञ डॉक्‍टर सुभाष कश्‍यप का कहना है कि आरोपियों की वापसी में वो बिंदु खास मायने रखते हैं जो प्रत्‍यर्पण संधि का हिस्‍सा बने हैं। उनके मुताबिक हर देश से होने वाली प्रत्‍यर्पण संधि में प्रेसक्राइब प्रॉविजन और उनका प्रोसिजर अलग-अलग हो सकते हैं। यह दोनों देशों के बीच संबंधों पर भी काफी कुछ निर्भर करता है। अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रत्‍यर्पण संधि को लेकर कोई नियम-कायदे नहीं बनाए गए हैं। इसलिए ये संधि दो देशों के बीच आपसी राय-मशविरे से और दोनों के हितों को देखते हुए तैयार की जाती है। अब हम आपको उन लोगों के बारे में जानकारी दे देते हैं जो भारत से भागकर ब्रिटेन में जा छिपे हैं।

नीरव मोदी  

भारत की अदालत से भगोड़ा करार दिए गए नीरव मोदी पर कई बैंकों को 13 हजार करोड़ रुपये का चूना लगाने का आरोप है। इस धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद पीएनबी के शेयर धड़ाम से गिर गए थे। इस इसी दौरान नीरव मोदी भारत से फरार हो गया और ब्रिटेन चला गया था। भारत सरकार की कोशिशों के बाद उसको 19 मार्च को लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद से ही नीरव मोदी वहां की वांड्सवर्थ जेल में बंंद है। नीरव की तरफ से लगाई गई जमानत याचिका को पहले वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की कोर्ट और जुलाई 2019 में हाईकोर्ट की तरफ से खारिज किया जा चुका है। कोर्ट ने इन याचिकाओं को खारिज करते हुए टिप्‍पणी की थी नीरव मोदी ब्रिटेन से भाग सकता है। इसलिए उसको जमानत नहीं दी जा सकती है।

आपको यहां पर ये भी बता दें कि नीरव मोदी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग कोर्ट ने दिसंंबर 2019 को देश का दूसरा भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था। नीरव मोदी ने वर्ष 2010 में ‘नीरव मोदी ग्लोबल डायमंड ज्वेलरी हाउस’ की स्‍थापना की थी। इस कंपनी का हेडक्‍वार्टर मुंबई में है। नीरव मोदी ‘क्रिस्टी’ और ‘सोथेबीस कैटलॉग’ पत्रिकाओं के कवर पर पब्लिश होने वाला पहला भारतीय जौहरी हैं।

विजय माल्‍या
विजय माल्‍या मार्च 2016 में ब्रिटेन भाग गया था। इसके बाद मई 2016 में भारत सरकार ने ब्रिटेन सरकार से माल्‍या को प्रत्‍यर्पित करने की अपील की थी, जिसको ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि माल्‍या वैलिड पासपोर्ट के साथ ब्रिटेन में दाखिल हुए थे, लिहाजा उन्‍हें जबरन प्रत्‍यर्पित नहीं किया जा सकता है। मई में ही माल्‍या ने भारत वापसी से इनकार कर दिया था। जनवरी 2019 में धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत बनी विशेष अदालत ने उसको भगोड़ा वित्तीय अपराधी घोषित किया था। इस कोर्ट द्वारा भगोड़ा करार दिया गया यह देश का पहला आरोपी है। यह फैसला कोर्ट ने ईडी की याचिका पर सुनाया था।

शराब कारोबारी विजय माल्‍या पर 17 बैंकों के 9 हजार करोड़ रुपये का गबन करने का आरोप है। आपको बता दें कि माल्‍या राज्‍य सभा से भी सांसद रह चुके हैं। भारत से फरार होकर फिलहाल लंदन में जीवन बिता रहे माल्‍या को प्रत्‍यर्पित करने की कोशिशों को उस वक्‍त सफलता मिली थी जब लंदन की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिसंबर 2018 में उसे भारत प्रत्‍यर्पित करने का आदेश दिया था। इस आदेश को माल्‍या ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर सुनवाई करते हुए 12 फरवरी को हाई कोर्ट ने माना कि भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ बेईमानी के पुख्ता सबूत हैं।

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4 दिन में 3 सरकारी बैंकों ने किए बड़े बदलाव, 50 करोड़ ग्राहकों को फायदा

बीते 4 दिन में सार्वजनिक क्षेत्र के 3 बड़े बैंक-एसबीआई, इलाहाबाद बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा ने एक खास बदलाव किया है. इस बदलाव के बाद इन तीनों बैंकों के करीब 50 करोड़ से अधिक ग्राहकों को बड़ी राहत मिलने की उम्‍मीद है.

Bank Inside

 

 

 

 

 

 

 

 

यहां बता दें कि एसबीआई के 40 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं तो वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा और इलाहाबाद के ग्राहकों की कुल संख्‍या भी 10 करोड़ से ज्‍यादा है. बहरहाल, आइए जानते हैं कि किस बैंक ने ग्राहकों को कितनी राहत दी है…

Allahabad Bank

इलाहाबाद बैंक-

इलाहाबाद बैंक ने अलग-अलग मैच्‍योरिटी अवधि के लिए सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) में 0.05 फीसदी की कटौती की है. बैंक ने कहा कि एक साल की मैच्‍योरिटी अवधि वाले लोन का एमसीएलआर अब 8.30 फीसदी से कम होकर 8.25 फीसदी पर आ गया है.

इसी तरह एक दिन, तीन महीने और छह महीने का एमसीएलआर कम होकर 7.75 फीसदी से 8.10 फीसदी पर आ गया है. एक महीने की मैच्‍योरिटी अवधि वाले कर्ज का एमसीएलआर स्थिर है. बैंक की संशोधित दरें 14 फरवरी से प्रभावी होंगी.

SBI Bank

एसबीआई-

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने MCLR में 0.05 फीसदी की कटौती का ऐलान किया है, जिससे कर्ज सस्ता हो जाएगा. यह कटौती सभी मैच्योरिटी पीरियड्स के लोन पर लागू होगी.

बैंक ने बताया है कि इस कटौती के बाद एक साल की अवधि वाले लोन पर एमसीएलआर कम होकर 7.85 फीसदी पर आ गया है. एसबीआई की यह कटौती बीते 10 फरवरी से प्रभावी है.

Bank of Baroda (Bob)

बैंक ऑफ बड़ौदा-

इसी तरह, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) ने अपनी सीमांत लागत आधारित ब्याज दरों (MCLR) में 0.10 फीसदी तक कटौती की है. बैंक की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ब्याज दर में कटौती के बाद एक साल की एमसीएलआर 8.25 फीसदी से घटकर 8.15 फीसदी पर आ गई है. ये नई दरें 12 फरवरी से लागू हैं.

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Jammu & Kashmir

आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहला पंचायत चुनाव, तारीखों का हुआ ऐलान

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद पहली बार पंचायत चुनाव हो रहे हैं। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से पहली बार राज्य में होने वाले पंचायत चुनावों की तारीखों का ऐलान हो गया है। जम्मू-कश्मीर के हर ब्लॉक में खाली पड़े पदों के पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। इस पंचायत चुनाव में बैलेट बॉक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। यह जानकारी जम्मू-कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी शैलेंद्र कुमार ने दी।

जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव 5 मार्च से 20 मार्च तक कराए जाएंगे। जम्मू-कश्मीर में इस पंचायत चुनाव को 8 चरणों में संपन्न कराया जाएगा। बता दें कि कश्मीर के कुछ इलाकों में चुनाव नहीं कराए जा सके थे। ये चुनाव उन्हीं इलाकों में होंगे।

जम्मू और कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी शैलेंद्र कुमार ने कहा कि जहां-जहां चुनाव होने हैं, वहां आज से आचार संहिता लागू हो गई। चुनाव आठ चरणों में होंगे। बता दें कि पिछले साल अगस्त में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को खत्म कर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था। जिसके बाद कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित राज्य बन गए थे।

जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सारे चरणों में होने वाले वोटिंग की तारीखों का ऐलान किया। 

पहले चरण का मतदान- 5 मार्च
दूसरे चरण का मतदान- 7 मार्च
तीसरे चरण का मतदान- 9 मार्च
चौथे चरण का मतदान- 12 मार्च
पांचवे चरण का मतदान- 14 मार्च
छठे चरण का मतदान- 16 मार्च
सातवें चरण का मतदान- 18 मार्च
आठवें चरण का मतदान- 20 मार्च

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Rape case

हरियाणा में युवती से गैंगरेप, वारदात में एक नाबालिग भी शामिल

अभी न‍िर्भया गैंगरेप केस के दोषी फांसी पर चढ़े भी नहीं है क‍ि हर‍ियाणा में एक और इस तरह के केस से हलचल मची हुई है. हर‍ियाणा के यमुनानगर में घर में सो रही एक लड़की को पांच लोग घर से उठा ले गए और एक आंगनवाड़ी में गैंगरेप की घटना को अंजाम द‍िया. हैवन‍ियत भरी इस घटना में एक नाबाल‍िग भी शाम‍िल था. पुल‍िस ने यह मामला रव‍िवार को दर्ज क‍िया.

घर में सो रही एक लड़की को पांच लोग घर से उठा ले गए और एक आंगनवाड़ी में गैंगरेप की वीभत्स घटना को अंजाम द‍िया. इस घटना में एक नाबालिग भी शामिल है. पुलिस पहचान के आधार पर आरोपियों की तलाश कर रही है.

जानकारी के मुताबिक, हरियाणा यमुनानगर में एक लड़की को पांच लड़के घर से उठाकर पास में एक बंद पड़ी के साथ मारपीट और गैंगरेप का मामला सामने आया है. पीड़िता ने भागने की कोशिश की तो उससे काफी मारपीट की गई. इससे पीड़िता को काफी चोट पहुंची है. आरोपी युवकों ने पीड़िता को उसके घर से उठाया और पास ही बंद पड़ी आंगनवाड़ी में अपराध को अंजाम दिया.

  • पांच लड़कों ने घर से उठाकर क‍िया लड़की से गैंगरेप
  • हरियाणा के यमुना नगर में खेला गया हैवान‍ियत का खेल

वारदात में एक नाबाल‍िग भी शामिल

घटना में एक नाबाल‍िग भी शामिल था. लड़की किसी तरह दरिदों के चंगुल से बचकर अपने घर पहुंची और पर‍िजनों को इस बारे में बताया. पर‍िजन लड़की को लेकर तुरंत थाने पहुंचे. पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए पीड़िता को चिकित्सीय मदद उपलब्ध कराई और आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया.

गैंगरेप और मारपीट की धाराओं में केस दर्ज
पुल‍िस ने घटना की नजाकत को देखकर लड़की का मेड‍िकल कराया. उसके बाद गैंगरेप और मारपीट की धाराओं में केस दर्ज कर ल‍िया. हालांक‍ि पुल‍िस ने शुरुआत में ही लड़की व पर‍िजनों के बयानों के आधार पर अपहरण, गैंगरेप और मारपीट का मामला दर्ज कर ल‍िया था लेक‍िन मेड‍िकल र‍िपोर्ट आने के बाद और एक और धारा जोड़नी पड़ सकती है. इस मामले में लड़की ने सभी आरोप‍ियों की पहचान भी बताई है. इसी आधार पर पुल‍िस आरोप‍ियों को पकड़ने की कोश‍िश कर रही है. जांच अध‍िकारी न‍िर्मल स‍िंह ने दावा क‍िया क‍ि अभी तक पुल‍िस के हाथ भले ही खाली हों लेक‍िन बहुत जल्द ही आरोपी सलाखों के पीछे होंगे.

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Chief-Electoral-Officer-Ranbeer-Singh

वोटिंग के आंकड़ों में 24 घंटे उलझी रही दिल्ली, देखिये- AAP के आरोप और EC के जवाब

दिल्ली विधानसभा चुनाव का फाइनल वोटिंग प्रतिशत जारी करने में चुनाव आयोग को पूरे 24 घंटे लग गए. दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव के वोटिंग के फाइनल आंकड़ो में देरी और गड़बड़ी करने को लेकर सवाल उठाए तो चुनाव आयोग ने देर शाम 62.59 प्रतिशत मतदान का अंतिम आंकड़ा जारी किया, जो 2015 के चुनाव से 5 फीसदी कम रहा. चुनाव आयोग ने कहा है कि हर बूथ से वोटिंग की डिटेल जुटाए जाने के बाद फाइनल आंकड़ा जारी किया गया है.

आम आदमी पार्टी द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद चुनाव आयोग ने रविवार को देर शाम बताया कि इस बार दिल्ली में 62.59 फीसदी वोटिंग हुई है. कुल वोटिंग में 62.55 प्रतिशत महिलाओं और 62.62 प्रतिशत पुरुषों ने वोट डाला. साल 2015 में विधानसभा चुनाव में 67.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था. इस तरह से इस बार पांच फीसदी कम वोटिंग रही.
  • दिल्ली चुनाव के फाइनल आंकड़े 24 घंटे बाद आए
  • आम आदमी पार्टी ने देरी पर उठाए सवाल

दरअसल दिल्ली विधानसभा चुनाव की वोटिंग के बाद शनिवार को चुनाव अयोग के ऐप पर पहले 57 फीसदी का अंतिम आंकड़ा दिखाया गया जो बाद में बढ़कर 61 फीसदी तक पहुंच गया. यही वजह रही कि आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने मतदान के आंकड़ों में गड़बड़ी का आरोप तक लगाया. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी सवाल खड़े हुए करते हुए कहा था कि चुनाव आयोग क्या कर रहा है?

फाइनल आंकड़े में देरी

वोटिंग प्रतिशत जारी करने में देरी पर दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी ने कहा कि हर पोलिंग स्टेशन से देर रात तक डेटा आते रहे. उन सब को जोड़कर फाइनल निष्कर्ष पर पहुंचने में वक्त लगा. उन्होंने बताया कि कई पोलिंग स्टेशन पर उपलब्ध कराए गए मोबाइल फोन में भी गड़बड़ी की शिकायत आ गई थी, जिसके चलते पूरा डेटा आने में थोड़ा ज्यादा वक्त लगा.

आप ने उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस कर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए थे कि वोटिंग संपन्न होने के इतने समय बाद तक मत प्रतिशत का आंकड़ा क्यों नहीं जारी किया गया है. लोकसभा चुनाव में 1 घंटे के अंदर चुनाव आयोग वोटिंग प्रतिशत बता देता है, दिल्ली जैसे छोटे राज्य में इतना विलंब क्यों?

संजय सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि कल से क्या खेल चल रहा है? कल चुनाव खत्म हो गए लेकिन अभी तक चुनाव आयोग के किसी अधिकारी ने वोटिंग प्रतिशत पर कोई अधिकृत बयान नहीं दिया है.

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी ट्वीट कर सवाल उठाए कि आखिर चुनाव आयोग ने वोटिंग के इतने समय बाद भी मत प्रतिशत क्यों नहीं जारी किए. मनीष सिसोदिया ने कहा कि बीजेपी के नेता मतदान के आंकड़े दे रहे हैं. उधर चुनाव आयोग मतदान ख़त्म होने के 24 घंटे के बाद तक नहीं बता पाया है कि वोटिंग कितने प्रतिशत हुई. आयोग कह रहा है कि अभी डेटा इकट्ठा किया जा रहा है.

क्या चल रहा है. क्या मतदान का फाइनल आंकड़ा बीजेपी ऑफिस से मिलना है आपको?

चुनाव आयोग ने जारी किए फाइनल आंकड़े

आम आदमी पार्टी द्वारा सवाल उठाए जाने बाद चुनाव आयोग ने रविवार को देर शाम बताया कि इस बार दिल्ली में 62.59 फीसदी वोटिंग हुई है. कुल वोटिंग में 62.55 प्रतिशत महिलाओं और 62.62 प्रतिशत पुरुषों ने वोट डाला. साल 2015 में विधानसभा चुनाव में 67.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था. इस तरह से इस बार पांच फीसदी कम वोटिंग रही.

आम आदमी पार्टी द्वारा खड़े किए सवालों पर दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी रणबीर सिंह ने कहा कि शनिवार को देर शाम तक वोटिंग होती रही, जिसके चलते हर बूथ से आंकड़े जुटाने में वक्त लगा. दिल्ली के हर बूथ से वोटिंग की डिटेल जुटाए जाने के बाद फाइनल आंकड़ा जारी किया गया है.

दिल्ली के बल्लीमारान विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 71.6 फीसदी वोटिंग हुई. दिल्ली कैंट इलाके में सबसे कम 45.4 फीसदी वोटिंग हुई. ओखला विधानसभा क्षेत्र में 58.84 और सीलमपुर में 71.22 फीसदी वोटिंग हुई. इस तरह से उन्होंने दिल्ली की सभी 70 सीटों का फाइनल आंकड़ा दिया.

 

 

 

 

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Petrol Pump

28 दिन में 4 रुपये तक सस्ता हुआ पेट्रोल-डीज़ल, इस वजह से और गिर सकते हैं दाम

देश की बड़ी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने लगातार तीसरे दिन पेट्रोल-डीज़ल सस्ता कर दिया हैं. शनिवार को दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में पेट्रोल (Petrol Price Today) के दाम 23-24 पैसे प्रति लीटर तक कम हो गए है. वहीं, इस दौरान डीज़ल (Diesel Price Today) की कीमतों में 25-27 पैसे प्रति लीटर की गिरावट दर्ज की गई हैं. आपको बता दें कि 11 जनवरी से अभी तक पेट्रोल-डीज़ल के दाम 4 रुपये प्रति लीटर तक गिर गए हैं. दुनिया की बड़ी रेटिंग एजेंसियों का कहना हैं कि चीन में फैले जानलेवा कोरोना वायरस (Corona-virus) के चलते दुनियाभर में बिजनेस गतिविधियां कम हो गई हैं. इसीलिए कच्चे तेल की डिमांड में बड़ी गिरावट आई है. जिसका असर कीमतों पर पड़ा है. आने वाले दिनों में कच्चे तेल के और सस्ता होने की उम्मीद हैं. लिहाजा घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर घट सकती हैं.

पेट्रोल के नए प्राइस (Petrol Price in India on 8 February 2020)- शनिवार को दिल्ली में पेट्रोल के दाम गिरकर 72.45 रुपये प्रति लीटर पर आ गए हैं. वहीं, मुंबई में 78.11 रुपये प्रति लीटर हैं. इसके अलावा कोलकाता में 75.13 रुपये प्रति लीटर और चेन्नई में 75.27 रुपये प्रति लीटर है.

डीज़ल के नए रेट्स (Diesel Rate in India on 8 February 2020)- शनिवार  को दिल्ली में डीज़ल के दाम गिरकर 65.42  रुपये प्रति लीटर पर आ गए हैं. वहीं, मुंबई में 68.57 रुपये प्रति लीटर हैं. इसके अलावा कोलकाता में 67.79 रुपये प्रति लीटर और चेन्नई में 69.10 रुपये प्रति लीटर है.

क्यों  सस्ता हो रहा हैं घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीज़ल– कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना हैं कि चीन में फैले घातक कोरोना वायरस (Corona-virus) से मरने वालों की संख्या बढ़कर 700 के पार निकल गई हैं. पुरी दुनिया कोरोना वायरस को लेकर अलर्ट पर है. कई देशों ने चीन जाने वाली अपनी उड़ानों को रद्द कर दिया है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, क्रूड के मामले में चीन दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश हैं. वह अपनी जरुरत का 80 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता हैं. चीन में वायरस की वजह से बिजनेस गतिविधियां और लोगों का एक शहर से दूसरे शहर में आना जाना काफी कम हो गया हैं. इसी वजह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की डिमांड घट गई हैं और कीमतों में बड़ी गिरावट आई हैं.आपको बता दें कि एक महीने में कच्चा तेल के दाम 30 फीसदी तक लुढ़क गए हैं. ब्रेंट क्रूड का भाव 74 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 52 डॉलर प्रति बरैल पर आ गया हैं.

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Delhi-Election

Delhi Election 2020: शाहीन बाग के बूथों पर उमड़ी मतदाताओं की भीड़, 400 मीटर तक लगी कतार

पिछले करीब डेढ़ महीने से शाहीन बाग में नागरिकता कानून के खिलाफ धरने पर बैठे लोगों के बीच दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर उत्साह देखने को मिला। पूरी ओखला विधानसभा सीट और खासकर शाहीन बाग इलाके में शनिवार सुबह से ही मतदाता पोलिंग बूथ पर पहुंचने लगे। यहां भारी संख्या में महिला और पुरुष मतादाता वोट देने के लिए पहुंच रहे हैं। इनके अलावा यहां वृद्ध वोटरों की भी अच्छी-खासी संख्या है। मालूम हो कि शाहीन बाग इलाका ओखला विधानसभा क्षेत्र के अंदर आता है। यहां पिछले 15 दिसंबर से भारी संख्या में लोग नागरिकता कानून, एनपीआर और एनआरसी के विरोध में बैठे हुए हैं।

Shaheen Bagh Voting

वोटिंग के चलते आज धरनास्थल पर लोग नजर नहीं आ रहे हैं और यहां सन्नाटा पसरा हुआ है। पंडाल में इक्का-दुक्का लोग ही मौजूद हैं।
15 दिसंबर से यहां की सड़कें जाम हैं। लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। पिछले दिनों यहां गोलीबारी की घटना हो गई थी, जिसके बाद माहौल और भी ज्यादा गंभीर हो गया था। ओखला विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी ने अमानतुल्ला खान, भारतीय जनता पार्टी ने ब्रह्म सिंह और कांग्रेस ने परवेज हाशमी को उतारा है।

 

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RBI ने आम लोगों को दिया झटका, लगातार दूसरी बार नहीं कम होगी आपकी EMI

उम्‍मीद के मुताबिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रेपो रेट में कटौती नहीं की है. यह लगातार दूसरी मौद्रिक समीक्षा बैठक है जब आरबीआई ने रेपो रेट को स्थिर रखा है. ऐसे में अब लोन की ब्‍याज दर और आपकी ईएमआई कम होने की गुंजाइश कम ही है. इससे पहले, दिसंबर में भी केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था. वहीं 2019 के शुरुआती पांच मौद्रिक समीक्षा बैठक में लगातार 5 बार रेपो रेट में कटौती की गई थी.

  • वर्तमान में रेपो रेट 5.15 फीसदी पर स्थिर है
  • लगातार दूसरी बार RBI ने नहीं की कटौती

बता दें कि वर्तमान में रेपो रेट 5.15 फीसदी पर स्थिर है. इसके अलावा रिवर्स रेपो रेट भी 4.90 फीसदी पर बरकरार है. रिजर्व बैंक ने कैश रिजर्व रेशयो यानी सीआरआर 4 फीसदी और SLR 18.5 फीसदी पर बनाए रखा है.वहीं आरबीआई बैंक का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी ग्रोथ 6 फीसदी रहेगी.

RBI Governer

 

क्‍या होता है रेपो रेट?

रेपो रेट वो दर होती है जिस पर बैंकों को आरबीआई फंड देता है और इसी फंड के आधार पर बैंक ग्राहकों को ब्‍याज दर में राहत देते हैं. हालांकि आरबीआई के रेपो रेट कटौती का बैंकों ने उम्‍मीद के मुताबिक फायदा नहीं पहुंचाया है. यही वजह है कि आरबीआई ने भी बैंकों से रेपो रेट कटौती का फायदा ग्राहकों को पहुंचाने की बात कही है.

क्‍यों नहीं हुई कटौती?
दरअसल, महंगाई के आंकड़े और बजट में  राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के संशोधन की वजह से आरबीआई दबाव में था. बता दें कि सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.8 फीसदी कर दिया है. इससे पहले राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.3 प्रतिशत रखा गया था. वहीं दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति 7.3 फीसदी के उच्च स्तर पर रही. इसका कारण सब्जी खासकर प्याज और टमाटर का महंगा होना है. यह आरबीआई की उम्‍मीद से ज्‍यादा है.

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